इतिहास

about dagdusheth ganapati

श्री दगडूशेठ हलवाई गणपती यह भक्तों के लाडले भगवान हैं । श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपती को पुणे शहर के गौरव का उच्चतम स्थान माना जाता है । हर साल भारत भर के और देश विदेशों के अनगिनत भक्त इस भगवान के दर्शन पाने के लिये आते हैं ।

श्री दगडूशेठ हलवाई गणपती यह मंदिर भक्तों के आदर और भक्ती का स्थान तो है ही, पर इतना ही नहीं, बल्कि समाज-सेवा और संस्कृति-संवर्धन के लिए प्रयत्नशील रही हुई एक महत्त्वपूर्ण संस्था के रूप में भी लोग इसे जानते हैं । ’श्री दगडूशेठ हलवाई गणपती मंदिर ट्रस्ट’ इस नाम से यह संस्था कार्यरत है । इस मंदिर के पीछे एक बहुत बडी और वैभवशाली परंपरा रही है ।

कई साल पहले अपना इकलौता बेटा प्लेग में खोने के बाद श्रीमंत दगडूशेठ और उनकी पत्नी लक्ष्मीबाई, इन दोनों ने इस गणेश मूर्ती की स्थापना की थी । उसके बाद अब हर साल ना केवल श्री दगडूशेठ का परिवार बल्कि आसपास के सभी लोग भाव-भक्ती से और बडे जोश के साथ गणेशोत्सव मनाते रहे । तब अपनी जवान उम्र में तात्यासाहेब गोडसे इस गणेश-उत्सव के एक उत्साही कार्यकर्ता थे । बाद में जब लोकमान्य तिलकजी ने आजादी के संघर्ष में लोगों को इकट्ठा करने के लिये गणेशोत्सव को सार्वजनिक उत्सव का रूप दिया तब दगडूशेठ गणपती को सर्वाधिक लोकप्रियता का सम्मान प्राप्त हुआ ।

१९५२ में दगडूशेठ हलवाई गणपती मंदिर उत्सव के अनुशासन की जिम्मेदारी तात्यासाहेब और उनके मित्र-परिवारपर आ पडी । तात्यासाहेब के मार्गदर्शन में उसके सहयोगी मामासाहेब रासणे, अॅड. श्री. शंकरराव सूर्यवंशी और श्री. के. डी. रासणे इन लोगो ने यह जिम्मा खूब अच्छी तरह निभाया और उसके बाद यह सिलसिला कभी रुका ही नहीं । उदार दानी व्यक्ती और भक्त मंदिर के दान-पात्र में बहोत उदारता के साथ अपना दान देते रहे । तब तात्यासाहेब और उनके मित्र-परिवार ने सोचा, कि इस निधी से अपनेही बांधवोंकी सेवा करने से बढकर ईश्वरसेवा और क्या हो सकती है? इस ध्येय से प्रेरित इन युवकों ने उत्सव के कार्य की व्याप्ती परंपरा प्राप्त पूजा विधी के आगे ले जाकर सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के क्षेत्र में कदम रखा । मंदिर में किये जानेवाले धर्मकार्य तो पूरे तामझाम से होते ही रहे, पर इन्होंने अपने राज्य के सामाजिक और राजनैतिक प्रश्नों की ओर भी अपना ध्यान मोडा ।

’श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपती मंदिर ट्रस्ट’ के माध्यम से उन्होंने कई समाजसेवी कार्यों का आरंभ किया । वंचित बच्चों की शिक्षा, और उन्हें पैसों की मदद, छोटे कारोबार खडे करनेवालों को या फिर छोटे विक्रेताओं को ’सुवर्णयोग सहकारी बँक’ की तरफसे आर्थिक सहाय्यता; वृद्धाश्रम, ईेंट-भट्टीके मजदूरों का पुनर्वसन यह कुछ उदाहरण इस में शामिल हैं ।

आज श्री गणेशजी के आशीर्वाद से ’श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई सार्वजनिक गणपती ट्रस्ट’ ये एक समाज की अगुवाई करनेवाली समृद्ध संस्था बन चुकी है । मानवसेवा ही ईश्वरसेवा है इस भाव से काम करने में एक बडा आनंद ले रही है ।